

दीपावली से पूर्व किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ एडवांस दे सरकार : नवाज खान
👉 अर्नब तूफान से धान की फसल को नुकसान, ₹15,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की मांग
👉 कांग्रेस की भूपेश सरकार त्योहारों से पूर्व किसानों को देती थी राजीव गाँधी न्याय योजना द्वारा राशि
✍️ रमेश निवल बालू
✍️महेश शर्मा
राजनांदगांव - छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था में धान की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है। लाखों किसान परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नवाज खान ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर किसानों की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि दीपावली से पूर्व प्रदेश के प्रत्येक पंजीकृत धान उत्पादक किसान को ₹10,000 प्रति एकड़ की दर से अग्रिम राशि सीधे उसके बैंक खाते में हस्तांतरित की जाए।
नवाज खान ने कहा कि प्रदेश में धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर से निर्धारित की गई है, जबकि किसानों के हित में खरीदी 1 नवंबर से शुरू होनी चाहिए थी। धान खरीदी में देरी के कारण किसानों को दीपावली से पहले अपनी उपज का भुगतान मिलने की उम्मीद कम हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को प्रदेश के किसानों की परेशानियों और त्योहार के समय उनकी आर्थिक जरूरतों की चिंता होती, तो वह धान खरीदी समय पर शुरू करने की व्यवस्था करती। जब सरकार ने खरीदी पहले शुरू नहीं की है, तो कम से कम किसानों को त्योहार से पूर्व आर्थिक सहायता देकर उनकी परेशानी दूर करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दीपावली खुशियों, रोशनी और समृद्धि का पर्व है। ऐसे अवसर पर किसान परिवार भी अपने बच्चों के लिए खरीदारी करना चाहते हैं और खुशहाली के साथ त्योहार मनाना चाहते हैं। लेकिन धान खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों के हाथ खाली हैं। अन्नदाता को अपनी मेहनत की कमाई के लिए इंतजार करना पड़े और वह त्योहार की खुशियों से वंचित रहे, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
नवाज खान ने कहा कि पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की थी। भूपेश बघेल सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति और त्योहारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए होली और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले किसानों के खातों में राशि पहुंचाने की व्यवस्था की थी, ताकि किसान परिवार भी खुशहाली से त्योहार मना सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार अगर किसानों की हितैषी है तो संवेदनशीलता दिखाते हुए इसी भावना से निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि प्रत्येक पंजीकृत धान उत्पादक किसान को ₹10,000 प्रति एकड़ की अग्रिम राशि दी जाए। धान विक्रय के बाद इस राशि को किसान के अंतिम भुगतान में नियमानुसार समायोजित किया जा सकता है। इससे किसानों को तत्काल आर्थिक सहारा मिलेगा और वे त्योहार की आवश्यकताओं को पूरा कर सकेंगे।
नवाज खान ने कहा कि एक ओर धान खरीदी में देरी के कारण किसान आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अर्नब तूफान के कारण बिगड़े मौसम, तेज हवाओं और बारिश ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल गिरने और बारिश के पानी में भीगने से उसकी गुणवत्ता तथा उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। किसानों के सामने एक तरफ त्योहार के लिए आर्थिक संसाधनों की कमी है, तो दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा से अपनी मेहनत की फसल को बचाने की चुनौती है।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि अर्नब तूफान से प्रभावित क्षेत्रों में धान की फसल को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए। प्रभावित गांवों और खेतों में वास्तविक नुकसान का आकलन कराकर किसानों को ₹15,000 प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण फसल को नुकसान पहुंचना किसान के लिए केवल खेती का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था पर संकट है। इसलिए सरकार को बिना अनावश्यक देरी के सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कर किसानों को राहत देनी चाहिए।
नवाज खान ने कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। सरकार की संवेदनशीलता केवल बयानों से नहीं, बल्कि किसानों के हित में लिए गए फैसलों से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार वास्तव में किसानों की चिंता करती है, तो उसे दीपावली से पूर्व प्रत्येक पंजीकृत धान उत्पादक किसान के खाते में ₹10,000 प्रति एकड़ अग्रिम राशि पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए और अर्नब तूफान से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए। इससे किसान परिवार आर्थिक चिंता से मुक्त होकर अपने घरों में खुशहाली के साथ दीपावली मना सकेंगे।
Publisher: प्रधान संपादक: रमेश निवल (बालू) प्रधान संपादक एवं मुद्रक: महेश शर्मा दुर्ग संभाग प्रभारी: नागेश यदु (रक्तवीर)
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