

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की पहल दे रही समाजसेवा का संदेश, बुजुर्गों, बच्चों, विद्यार्थियों और बेजुबान पक्षियों की सहायता पर जोर
बालोद। सम्मान और स्वागत-सत्कार की परंपरा को समाजसेवा से जोड़ने की एक पहल बालोद कलेक्ट्रेट में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की पहल से कार्यालय के बाहर लगाया गया एक पोस्टर लोगों को गुलदस्तों के बजाय जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

इस पोस्टर में अपील की गई है कि अतिथियों के स्वागत में गुलदस्ते भेंट करने के स्थान पर ऐसे कार्य किए जाएं, जिनसे समाज के जरूरतमंद लोगों और प्रकृति को वास्तविक लाभ मिल सके।
पोस्टर के माध्यम से लोगों से जरूरतमंद बुजुर्गों की मदद करने, कुपोषित बच्चों के पोषण में योगदान देने और विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही पेड़-पौधों की सुरक्षा तथा बेजुबान पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने जैसे कार्यों को भी प्रोत्साहित किया गया है।
इस पहल का मूल संदेश है कि सम्मान केवल फूलों और गुलदस्तों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे जरूरतमंदों की सहायता और समाजहित के कार्यों से जोड़ा जाए। गुलदस्ते कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं, लेकिन किसी जरूरतमंद की मदद से मिलने वाली राहत और चेहरे पर आने वाली मुस्कान लंबे समय तक याद रहती है।
प्रशासन की ऐसी पहल नागरिकों को सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर सकती है। जब नागरिक अपने विशेष अवसरों और स्वागत-सत्कार को सेवा कार्यों से जोड़ते हैं, तो जरूरतमंदों को सहायता मिलने के साथ समाज में संवेदनशीलता और जनभागीदारी की भावना भी मजबूत होती है।
बालोद कलेक्ट्रेट की यह पहल एक सरल संदेश देती है—सम्मान का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उससे किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।
Publisher: प्रधान संपादक: रमेश निवल (बालू) प्रधान संपादक एवं मुद्रक: महेश शर्मा दुर्ग संभाग प्रभारी: नागेश यदु (रक्तवीर)
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