
✍️ रमेश निवल बालू
✍️ महेश शर्मा
राजनांदगांव।
गौसेवा के उद्देश्य से संस्था को मिली जमीन के संभावित विक्रय को लेकर राजनांदगांव में चर्चा शुरू हो गई है। गौशाला पिंजरापोल की सामान्य सभा की बैठक सूचना में तीन अलग-अलग स्थानों पर स्थित कुल 42.436 हेक्टेयर, यानी करीब 104.86 एकड़ भूमि के विक्रय पर विचार-विमर्श एवं निर्णय का विषय एजेंडे में शामिल किया गया है।

बैठक 4 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे गौशाला परिसर में प्रस्तावित है। एजेंडे में वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय-व्यय की प्रस्तुति एवं अनुमोदन, वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुमानित बजट तथा जमीन बिक्री से जुड़े तीन प्रस्ताव शामिल हैं।
बैठक सूचना के अनुसार पहला प्रस्ताव ग्राम फत्तेजगंज/चिचरारी, तहसील लाल बहादुर नगर स्थित 19.161 हेक्टेयर भूमि के विक्रय से संबंधित है।
दूसरा प्रस्ताव ग्राम बंजारी, तहसील डोंगरगढ़ स्थित 10.130 हेक्टेयर भूमि की बिक्री से जुड़ा है।
तीसरा प्रस्ताव ग्राम कोकवा, तहसील छुईखदान, जिला खैरागढ़ स्थित 13.1450 हेक्टेयर भूमि के विक्रय से संबंधित है।
तीनों प्रस्तावित जमीनों का कुल रकबा करीब 42.436 हेक्टेयर है।
जमीन बिक्री का प्रस्ताव सामने आने के बाद अब सवाल संस्था को मिली संपत्ति के उद्देश्य और उसके उपयोग को लेकर उठ रहे हैं। यदि जमीन गौसेवा के उद्देश्य से संस्था को दान में प्राप्त हुई है, तो उसके विक्रय की आवश्यकता क्यों महसूस हुई—यह जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
यदि कोई जमीन अनुपयोगी है, गौशाला के उद्देश्य के लिए उपयोग में नहीं आ रही है अथवा उसके रखरखाव में आर्थिक बोझ पड़ रहा है, तो इन कारणों को सामान्य सभा के समक्ष स्पष्ट किया जाना अपेक्षित है।
यदि सामान्य सभा में जमीन बिक्री के प्रस्ताव पर निर्णय होता है तो कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आएंगे। इनमें जमीन का मूल्य निर्धारण, बाजार मूल्य, बिक्री की प्रक्रिया, आवश्यक अनुमति तथा बिक्री से प्राप्त राशि के उपयोग का विषय प्रमुख होगा।
खास तौर पर यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित बिक्री से प्राप्त धनराशि किस उद्देश्य के लिए खर्च की जाएगी और उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा जाएगा।
गौरतलब है कि सामान्य सभा के एजेंडे में वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय-व्यय की प्रस्तुति एवं अनुमोदन तथा 2026-27 के अनुमानित बजट को भी शामिल किया गया है।
ऐसे में जमीन बिक्री की आवश्यकता को समझने के लिए संस्था की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत, व्यय और भविष्य की वित्तीय जरूरतों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
जमीन बिक्री का प्रस्ताव फिलहाल सामान्य सभा के एजेंडे में शामिल होने की जानकारी है। इसलिए अंतिम निर्णय और आगे की प्रक्रिया सामान्य सभा में लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।
हालांकि, यदि दान अथवा गौसेवा के उद्देश्य से प्राप्त संपत्ति के विक्रय का निर्णय लिया जाता है, तो इसकी वजह, मूल्यांकन प्रक्रिया और बिक्री से प्राप्त राशि के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने से पारदर्शिता बनी रहेगी।
आखिर सवाल सिर्फ 42.436 हेक्टेयर जमीन के संभावित विक्रय का नहीं है, बल्कि यह भी है कि संपत्ति किस उद्देश्य से प्राप्त हुई थी, उसे बेचने की जरूरत क्यों पड़ी और यदि बिक्री होती है तो उससे प्राप्त राशि का उपयोग गौसेवा के लिए किस तरह किया जाएगा।
Publisher: प्रधान संपादक: रमेश निवल (बालू) प्रधान संपादक एवं मुद्रक: महेश शर्मा दुर्ग संभाग प्रभारी: नागेश यदु (रक्तवीर)
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