Rajnandgaon
Breaking

नियमों पर सवाल: स्थानीय संचालकों पर सख्ती, बाहर से आए डीजे पर नरमी?

Super Admin••Rajnandgaon •61 views
नियमों पर सवाल: स्थानीय संचालकों पर सख्ती, बाहर से आए डीजे पर नरमी?

नियमों पर सवाल: स्थानीय संचालकों पर सख्ती, बाहर से आए डीजे पर नरमी?

✍️ रमेश निवल बालू

✍️ महेश शर्मा

राजनांदगांव

गणेश विसर्जन एवं झांकी के दौरान डीजे साउंड सिस्टम को लेकर राजनांदगांव में पुलिस-प्रशासन के निर्देशों के पालन पर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय डीजे संचालकों का कहना है कि प्रशासन ने बैठक में उन्हें सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के निर्देशों तथा ध्वनि प्रदूषण के निर्धारित मानकों का हवाला देते हुए साउंड सिस्टम की संख्या और आवाज नियंत्रित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद विसर्जन के दौरान कुछ बाहरी डीजे संचालकों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक साउंड बॉक्स लगाए जाने की शिकायत सामने आ रही है।

18 सितंबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गणेश विसर्जन झांकी समितियों एवं डीजे-धुमाल संचालकों की बैठक में 4 बेस और 4 टॉप, यानी कुल 8 डीजे साउंड सिस्टम से अधिक का उपयोग नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही निर्धारित रूट, अनुशासन, ध्वनि सीमा तथा अन्य नियमों के पालन की हिदायत दी गई थी।

स्थानीय संचालकों का आरोप है कि उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपने साउंड सिस्टम सीमित रखे, लेकिन विसर्जन के दौरान बाहर से आए कुछ डीजे संचालकों के वाहनों में इससे कहीं अधिक बॉक्स लगाए गए और तेज आवाज में डीजे बजाया गया। यदि यह स्थिति सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ही आयोजन में स्थानीय और बाहरी डीजे संचालकों के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों दिखाई दे रहे हैं बाहर से आए डीजे वाले 12 से 16 बक्से लगाए है और प्रशासन मौन है।

सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट की गाइडलाइन का हवाला

Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के तहत लाउडस्पीकर अथवा पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति आवश्यक है। नियमों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर सामान्य प्रतिबंध है, जबकि निर्धारित शर्तों के तहत धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए सीमित अवधि की छूट का प्रावधान है। साथ ही निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

अदालती निर्देशों में भी ध्वनि सीमा के पालन और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई पर जोर दिया गया है। हालिया न्यायिक कार्यवाहियों में अधिकारियों को ध्वनि स्तर की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

प्रशासन से स्थानीय डीजे संचालकों का सवाल

स्थानीय डीजे संचालकों का कहना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो उनका पालन भी सभी से समान रूप से कराया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि जब उन्हें नियमों का पालन करने के लिए साउंड सिस्टम सीमित रखने के निर्देश दिए गए हैं, तो कथित रूप से अधिक बॉक्स और अधिक आवाज वाले बाहरी डीजे संचालकों पर भी उसी तरह कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

अब स्थानीय डीजे संचालकों की नजर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर है। उनका कहना है कि नियम लागू करने में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और यदि कोई डीजे संचालक निर्धारित संख्या या ध्वनि सीमा का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

हालांकि, बाहरी डीजे संचालकों को किसी विशेष व्यक्ति की कृपा या संरक्षण मिलने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि विसर्जन के दौरान कितने डीजे संचालकों की जांच की गई, कितनों ने निर्धारित सीमा का उल्लंघन किया और उल्लंघन पाए जाने पर कितनी कार्रवाई की गई।

Share:WAFBXin

Related News

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment.

Login to post a comment.