लक्ष्मीनारायण 108 कुंडीय महायज्ञ भूमिपूजन में जल संरक्षण का संकल्प जागरूकता का संदेश: मोतीपुर स्कूल मैदान में राष्ट्रीय संत डा. इंद्रदेवेश्वरानंद ने समझाई पानी की महत्ता

लक्ष्मीनारायण 108 कुंडीय महायज्ञ के भूमिपूजन में जल संरक्षण का संकल्प
मोतीपुर स्कूल मैदान में राष्ट्रीय संत डॉ. इंद्रदेवेश्वरानंद ने बताया जल संरक्षण का महत्व
राजनांदगांव रमेश निवल बालू /महेश शर्मा ।। मोतीपुर स्थित स्कूल मैदान में दिसंबर माह में आयोजित होने वाले गृह शांति लक्ष्मीनारायण 108 कुंडीय महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के लिए गुरुवार को विधिवत भूमिपूजन किया गया। राष्ट्रीय संत एवं कथा वाचक डॉ. इंद्रदेवेश्वरानंद सरस्वती महाराज की उपस्थिति में भगवान विष्णु के जयकारों के बीच महापौर मधुसूदन यादव ने पूजन कार्य संपन्न कराया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय संत डॉ. इंद्रदेवेश्वरानंद ने बढ़ते पर्यावरणीय असंतुलन और जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए जल संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जल है तो कल है और जल को सहेजना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि महायज्ञ भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महायज्ञ के दौरान कुंडों में औषधीय जड़ी-बूटियों एवं लकड़ियों का उपयोग किया जाएगा, जो वातावरण को शुद्ध करने में सहायक होंगी।
समाजसेवी जयमहेश सिन्हा के परिवार द्वारा आयोजित किए जा रहे इस महायज्ञ की शुरुआत 21 दिसंबर को कलश यात्रा के साथ होगी। इसके बाद 22 से 28 दिसंबर तक महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन सुबह 108 कुंडीय महायज्ञ होगा, जिसमें आयुर्वेदिक महत्व वाली जड़ी-बूटियों एवं लकड़ियों का उपयोग किया जाएगा। गोबर के कंडे और घी आदि से आहुतियां दी जाएंगी। वहीं दोपहर के समय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होगा

भूमिपूजन कार्यक्रम में राष्ट्रीय संत डॉ. इंद्रदेवेश्वरानंद महाराज के भक्त छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पहुंचे। कार्यक्रम का मंच संयोजन महापौर परिषद में लोक निर्माण विभाग के प्रभारी सदस्य सावन वर्मा ने किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष किरण साहू, पार्षद मणि भास्कर गुप्ता, मनोहर यादव, दीपक चौहान, किशुन यदु, नरेंद्र यादव, लाला यादव, दिनेश शर्मा, प्रकाश साहू, गुलाब वर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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संतों के सानिध्य से ही जीवन में सुख है: महापौर
आयोजन समिति के संरक्षक एवं महापौर मधुसूदन यादव ने स्वागत उद्बोधन में धर्म और संतों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज लोगों के पास विलासिता की अनेक वस्तुएं हैं। हर घर में सोफा सेट, टीवी सेट और कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन धर्म से विमुख व्यक्ति का जीवन असंतुलित हो जाता है। वहीं धार्मिक कार्यों से जुड़ने और संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सकारात्मकता आती है।
महापौर ने कहा कि गृह शांति लक्ष्मीनारायण 108 कुंडीय महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से शहर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को आध्यात्मिक एवं सामाजिक रूप से लाभ मिलेगा। उन्होंने आयोजन को भव्य एवं दिव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
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