
*********************
राजनांदगांव
*********************
संस्कारधानी राजनांदगांव की ऐतिहासिक गणेश विसर्जन झांकी शनिवार की रात आस्था, भक्ति, कला, संस्कृति और रचनात्मकता के अद्भुत संगम की गवाह बनी। महाकाल चौक से शुरू हुआ झांकियों के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। शहर की प्रमुख सड़कों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक उमड़े। राजनांदगांव के अलावा आसपास के गांवों तथा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भी लोग ऐतिहासिक झांकियों को देखने पहुंचे। रातभर शहर गणपति बप्पा के जयकारों से गूंजता रहा।
इस वर्ष करीब 35 झांकियां विसर्जन यात्रा में शामिल हुईं। प्रत्येक झांकी अपने अलग विषय, आकर्षक साज-सज्जा, विद्युत रोशनी और कलात्मक प्रस्तुति के कारण लोगों का ध्यान खींचती रही। कहीं पौराणिक कथाओं और देवी-देवताओं के स्वरूप नजर आए तो कहीं आधुनिक कथाओं और फिल्मों से प्रेरित दृश्यों को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्तिक से कांतारा, भगवान जगन्नाथ से लेकर वीरभद्र के रौद्र रूप और कल्कि अवतार तक विभिन्न विषयों ने लोगों को आकर्षित किया।
भक्ति के साथ दिखी रचनात्मकता

इस बार झांकियों में धार्मिक आस्था के साथ कलात्मकता और आधुनिक तकनीक का भी समावेश दिखाई दिया। महाकाल चौक से निकली झांकियों में भगवान विष्णु के भावी कल्कि अवतार, कांतारा की लोक आस्था, वीरभद्र का रौद्र रूप और भगवान जगन्नाथ की ओडिशा परंपरा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
विशाल प्रतिमाओं के साथ चलित दृश्यों, विद्युत सज्जा और रंगीन रोशनी का प्रयोग झांकियों को और भव्य बना रहा था। कई स्थानों पर श्रद्धालु झांकियों के सामने रुककर दर्शन करते और मोबाइल से फोटो व वीडियो बनाते नजर आए।
पुराना बस स्टैंड क्षेत्र की झांकी में भगवान वीरभद्र के रौद्र स्वरूप और पौराणिक प्रसंगों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। वहीं उमंग समिति की झांकी में त्रिदेव परिवार के दर्शन कराए गए, जिसे देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
रामायण-महाभारत से जगन्नाथ परंपरा तक
गणेश विसर्जन झांकी में धार्मिक और पौराणिक कथाओं की भी विशेष झलक दिखाई दी। विभिन्न समितियों ने रामायण और महाभारत के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। भगवान जगन्नाथ की भव्य झांकी में ओडिशा की धार्मिक परंपरा और आस्था को दर्शाया गया।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मनोरंजन के साथ भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी नजर आया। बच्चों और युवाओं में झांकियों को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।
कांतारा और कल्कि अवतार ने खींचा ध्यान
फिल्म कांतारा से प्रेरित झांकी भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। लोक आस्था, परंपरा और वीरता से जुड़े दृश्यों को पारंपरिक वेशभूषा और साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत किया गया। वहीं भगवान विष्णु के कल्कि अवतार पर आधारित झांकी में विशाल प्रतिमा और आकर्षक रोशनी के माध्यम से धार्मिक मान्यताओं को दर्शाया गया।
रात 9 बजे के बाद उमड़ता गया जनसैलाब
महाकाल चौक से रात करीब 9 बजे के बाद झांकियों का सिलसिला तेज हुआ। इसके साथ ही शहर में भीड़ लगातार बढ़ती गई। प्रमुख मार्गों पर दर्शकों की कतारें लग गईं। परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने घंटों इंतजार कर झांकियों का आनंद लिया।
ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग भी देर रात तक झांकी देखने के लिए रुके रहे। डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया। जगह-जगह श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए और वातावरण लगातार ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजता रहा।
सड़कें बनीं जनसैलाब का हिस्सा
झांकियां देखने उमड़ी भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर की प्रमुख सड़कें देर रात तक खचाखच भरी रहीं। सड़क किनारे बड़ी संख्या में लोग झांकियों के आने का इंतजार करते नजर आए। राजनांदगांव की गणेश विसर्जन झांकी की पहचान अब शहर की सीमाओं से बाहर तक बन चुकी है। हर वर्ष आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं।
800 से अधिक जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
इतने बड़े आयोजन के बीच सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना पुलिस-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रही। प्रशासन द्वारा झांकी मार्ग और प्रमुख स्थानों पर 800 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी।
आईजी अजय यादव, एसपी अंकिता शर्मा और एसडीएम गौतम पाटिल सहित आला अधिकारियों ने मानव मंदिर चौक और झांकी मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए।
झांकी मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखी गई। बैरिकेडिंग के जरिए भीड़ और यातायात को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार मैदान में मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों ने भी देखीं झांकियां
ऐतिहासिक गणेश विसर्जन झांकी को देखने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी पहुंचे। सांसद संतोष पांडे, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह और महापौर मधुसूदन यादव सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने झांकियों का अवलोकन किया।
संस्कारधानी की सांस्कृतिक पहचान
गणेश विसर्जन की यह परंपरा राजनांदगांव की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर वर्ष गणेश उत्सव समितियां अपनी झांकियों को अधिक आकर्षक और रचनात्मक बनाने का प्रयास करती हैं। इस बार भी धार्मिक कथाओं, पौराणिक प्रसंगों, लोक आस्था, भारतीय संस्कृति और आधुनिक रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला।
कार्तिक से कांतारा तक, वीरभद्र के रौद्र रूप से भगवान जगन्नाथ की भव्यता तक और रामायण-महाभारत से कल्कि अवतार तक—35 झांकियों ने संस्कारधानी की रात को भक्ति, कला और रचनात्मकता के रंगों से सराबोर कर दिया। देर रात तक शहर में उत्सव का माहौल बना रहा और हजारों लोगों की मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि राजनांदगांव की ऐतिहासिक गणेश विसर्जन झांकी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक उत्सव की जीवंत पहचान है।
Publisher: प्रधान संपादक: रमेश निवल (बालू) प्रधान संपादक एवं मुद्रक: महेश शर्मा दुर्ग संभाग प्रभारी: नागेश यदु (रक्तवीर)
No comments yet. Be the first to comment.
Login to post a comment.